अगर आपको फिल्म देखना है तो कहीं और जाइए, और अगर आपको बड़े पर्दे पर क्रिकेट देखने का मज़ा लेना है तो फिल्म “ विक्टरी” देखने जरूर जाइए।

हम तो हैं क्रिकेट के बड़े दीवाने, इसलिए फिल्म समीक्षकों की आलोचनाएं अनदेखी कर, इष्ट- मित्रों की सलाह अनसुनी कर हम “विक्टरी” देखने चले गए और खूब आनंद लिया बड़े पर्दे पर क्रिकेट की धमाचौकड़ी देखने का।

हर भारतीय क्रिकेट का दीवाना होता है और उसने खुद कभी क्रिकेट खेला हो या नहीं, जिंदगी में कभी बल्ला थामा हो या नहीं, उसके सपनों में भारतीय क्रिकेट टीम का सदस्य बनने का सपना जरूर शामिल होता है। उसके दिल में यह जरूर आता है, काश मैं भी वह टोपी पहन पाता- वह कोट पहन पाता जो भारतीय टेस्ट टीम के खिलाड़ी पहनते हैं।

एक मित्र का कहना था कि जब फिल्म “विक्टरी” में हरमन बावेजा भारतीय क्रिकेट टीम का “ब्लेजर” पहन कर आईने के सामने खड़े होते हैं तो दृश्य ने उनके रोंगटे खड़े कर दिए। यह हरमन की अभिनय क्षमता का नहीं बल्कि उस दृश्य से जुड़े क्रिकेट प्रेम का कमाल था।

सच बता रहे हैं, हम जब फिल्म देख रहे थे तो थियेटर में मुश्किल से दो दर्जन लोग थे। लेकिन उनमें से एक भी शख्स फिल्म खत्म होने तक अपनी जगह से नहीं हिला। “गज़नी” जैसी सुपरहिट फिल्म में भी दर्शकों को अंतिम दृश्य खत्म होने से पहले थियेटर छोड़ कर जाते देखा है हमने, लेकिन “विक्टरी’ जैसी जिस फिल्म की इतनी बुराई की गई है उसमें अंत तक हर दर्शक कुर्सी से चिपका बैठा रहा जैसे कुछ और क्रिकेट देखना चाहता हो।

बड़े पर्दे पर ब्रेट ली, सनत जयसूर्या, मुरलीधरन, हरभजन जैसे खिलाड़ियों को खेलते देखना मजेदार अनुभव था। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है असली मैचों के दौरान फिल्माई गई दर्शकों की प्रतिक्रियाएं फिल्म के मैचों में बखूबी जोड़ दी गई हैं। फिल्मी मैच में जो कमेंटरी की जाती है वह असली मैचों में हुई घटनाओं से इस तरह बेहतरी से जोड़ी गई हैं कि मजा आ जाता है।

सीधी सी बात है भैया, अगर क्रिकेट प्रेमी हो तो “विक्टरी” देखने जरूर जाना। अगर फिल्म प्रेमी हो तो “लक बाई चांस” देखने जाना जो हमें महा-उबाऊ लगी।



1 Response to ““विक्टरी”: क्रिकेट प्रेमी हैं तो देखने जाइए ”

  1. 1 sandeep

    जी फ़िर तो देखनी ही पड़ेगी क्योंकी हम भी आपकी तरह क्रिकेट प्रेमी हैं ।
    :-)

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