“करोड़पति झोपड़िया कुत्ता” और ओबामा
Published by शेखचिल्ली January 22nd, 2009 in नया भारत.भारत में “फॉरेन रिटर्न” की बड़ी इज्जत होती है। कोरियाई, चीनी, जापानी वगैरह नहीं, ब्रिटिश और अमेरिकी ठप्पा चाहिए, फिर देखो भारत में कैसे उसकी धूम मचती है। मीडिया तो चरण धो- धो कर पीता है उनके। वैज्ञानिक, कलाकार, लेखक, अंतरिक्ष वैज्ञानिक- जब तक देश में रहते हैं कोई पूछता तक नहीं। अंग्रेजी देस का ठप्पा लगा और 24/7 गुणगान देख लीजिए भारत में।
यही हाल इन दिनों “करोड़पति झोपड़िया कुत्ता” और ओबामा का किया जा रहा है। तीन दिन हो गए ओबामा को शपथ लिए, अमेरिकी टीवी चैनलों तक ने उनकी शपथ और उसके बाद का नाच-गाना दिखाना बंद कर दिया है लेकिन भारतीय चैनलों पर सुबह-दोपहर-शाम ओबामा- स्तुति बंद नहीं हुई है।
बाकी समय में “करोड़पति झोपड़िया कुत्ता” (“स्लमडॉग मिलियनेर” का देसी अनुवाद:) ) का गुणगान किया जा रहा है। मालूम था कि फिल्म भारत में पहले प्रदर्शित हुई तो झोपड़पट्टी के कुत्ते भी “गजनी” छोड़ कर यह फिल्म देखने नहीं आएंगे। इसलिए मुम्बई पर बनी फिल्म होते हुए भी यह फिल्म भारत में अब तक प्रदर्शित नहीं की गई।
अब जब विदेशी पुरस्कारों का ठप्पा लग गया है तब भारत में प्रदर्शित की जा रही है फिल्म, क्योंकि निर्माताओं को मालूम है, जनता-जनार्दन अब जरूर टूटेगी फिल्म पर। और तो और, जिस उपन्यास पर फिल्म बनी है वह दूकानों में अब तक धूल खाती पड़ी थी, लेकिन फिल्म को पुरस्कार मिले तो हाथों- हाथ बिक गईं सारी प्रतियां।
सबक: झोपड़िया कुत्ता अंग्रेजी में भौंके, तो करोड़पति बनने में देर नहीं लगती।
जी हां हमारे देश में सिर्फ “फॉरेन रिटर्न” की ही नही, फॉरेन से आकर बसने वालों की भी बहुत इज्जत होती है. हम तो उन्हें महारानी या महाराजा के रूप में देखने लग जाते हैं. हजारों सालों तक विदेशी शासकों के अधीन रहते रहते ऐसी आदत पङ गई कि हमें अपना देशी व्यक्ति प्रधान मंत्री भी बनाना हो तो विदेशी महारानी की इछा से ही सम्भव हो पाता है. हमारे घरों में तो कुतिया भी देशी नही पाली जाती, विदेशी नस्ल में अधिक गुणवत्ता जो होती है. विदेशी स्लम डॉग की इज्जत की जाती है, ‘झोंपङिया कुत्ते’ को कोई नही पूछता. दरअसल हमारे यहां जो ‘झोंपङिया कुत्ते’ होते हैं वो वोट बैंक के नाम से जाने जाते हैं. वो करोङपति नही, रोड पति होते हैं
बहुत सही बात लिखी है आपने
bilkul sahi likha hai aapne, hamare yaha to USA Return ki chandi hoti hai log uski pooja karte hai, use ijjat se dekhte hai. lekin videsh mai kai jagah likha hota hai Indian and Dogs are not allowed, ye baat videshi returned jaante hai lekin unhe yahan jo ijjat milti hai usse wo aur fool jaate hai.