परमाणु करार ने देश के दो निठल्ली प्रजातियों को व्यस्त रहने का मौका दे दिया है।

हाशिए पर पड़े नेता और कम-दिमाग टीवी चैनल।

नेता एक –दूसरे से मिल रहे हैं और टीवी चैनल ब्रेकिंग न्यूज दे रहे हैं “फलाना नेता ढिकाना नेता से मिले।”

सुबह से शाम तक हर कोई एक-दूसरे से मिल रहा है और उसकी “टूटती खबर” आ रही है। भले ही नेता यह कहने के लिए मिल रहे हों “अरे, आप अभी तक जिंदा हैं?!”, खबरिया चैनल हर मुलाकात को परामाणु करार से जोड़ रहे हैं।

अमर सिंह भी बड़े दिन बाद राजनीतिक विषय पर खबर में आए, वर्ना “बड़े भैया” के साथ फिल्मी समारोहों तक ही सीमित रह गए थे।

अच्छा है, देश को क्रिकेट के अलावा कुछ तो और मिला व्यस्त रहने के लिए।



24 Responses to “करार पर सब बेकरार”

  1. 1 amit buwaniwala

    news channal aaj kal news channal nahi manoranjan channal ban gaye hai. reality show aur comedy shows ki clip dikhane se fursat mliegi toh hi kuch desh se judi khabar dikhayange.

  2. 2 liteshmehra

    news chneal ma news kam bakwas jyada hoti ha enha rokna hoga

  3. 3 m k patel

    khabre nahi to bekhabar hona jaroori hai?karar na hua to bekarar hona jaroori hai? aur ab manoranjan ke sthan par kai aisi baten khoj khoj kar laten hain jo samaj ko tanav he de pate hai, apradho ke naye naye anumanit tareeke sabhi ko paroste hain.aaj is sabke liye jaise real ity aur com edy shows ke bhiskar ke majboot erade ki jarurat hai.samachar vale to janta ko aakhiri boond tak choos lena chahte hain, chupchap dekhte rahne bhi kaisa rahega?

  4. 4 vivek anand saraya gkp

    parmanu karar bole to VANDEMATRAM

  5. 5 Deepak Sharma

    Agar Parmanu karar deshhit me hai to usse jaroor karna chahiye. hamare desh ki rajnitik partiyo ko vaigyaniko or raksha visheshagyo ki madad se ye faisla karna chahiye ke ye karar karna hai ya nahi. iss tarah se rajnitik rotiyo ko apne matlab ke liya nahi sekna chahiye, akhirkaar desh se badhkar kuch bhi nahi hai.

  6. 6 lachhi

    ajkal sabhi news channel apni trp bdane ke chakkr mein andhe ho gaye hain.apki in gairjimmedarana harkaton se samaj main kya asar par raha hai socho.ap sab jagjao

  7. 7 ashwan

    kabhi bhi aap email ka jawab nhi dete na hi aap bato p gor karte ho .mene apne 6 sal sui ke surakh me des ka janda banane me oar bahut se pase lag gay na koi job ha mene ye ish ley kia kiu ki landen ke ek aadmi ne 60 sal kors kar ke needle art bana par mene koi kors nhi kia oar ye soch ke ki god ne muje kala di ha to logo tak lau

  8. 8 vijendra singh bhadoria

    karar par keval left bekarar hai kyunki ye log india ko aage badta hua nahi dekhna cahte hai ye log china ke gulam hai,in logoko vahi jakar rahna cahiye.

  9. 9 Vaibhav mishra

    yeh toh sahi hai ki kuch channels ke pass farzi ki breaking news dene ke alawa koi kaam nahi bacha hai.[india tv,even aajtak,star news nd many more tatpuziya channels] lekin nuclear deals ke khabr ko brkng news batana utna shocking nahi hai jitna ki logo ke ghr ke poltics ko braking batana . neta to aaam aadami ki aankh main dhool aaj se nahi kayi saalo se jhok rahe hai.hum logo ko in sab se seekh lekar in sabko inki jagah se hatana chaiyeye.

  10. 10 deepak

    Han, sabhi MP ko website ki ebay main nilam karna chahiye, muzhe maloom hona chahiye ki mere area ke MP ka rate kiya chal raha hai

  11. 11 Jitesh Prakash

    Is desh ke so called budhijivi kya kar rahe hain? They should come forward and make people understand what is good and what is bad. Is it not their responsibility?

  12. 12 himanshu

    AAPNE KABHI DEKHA HAI NEWS CHANNELS KO AKHBAR ME ISTEHAR DETE HUYE, NAHI NA? YAHA TO SIRPH SIFARISH CHALTi HAI, TO BAKWAS NAHI DIKHAYENGE TO KYA DIKHAYENGE

  13. 13 sanjeev

    लाचार लोकतन्‍त्र
    भारत का लोकतन्‍त्र संख्‍या के अनुसार विश्‍व का सबसे बडा लोकतन्‍त्र हो सकता है लेकिन स्‍तर के अनुसार यह कहा है आये इसकी चर्चा करें।
    शुरूवात करें।
    १. बाटों और राज करो की निति से कितने ऐसे लोक प्रतिनिधि होते होगें जिन्‍हें अपने क्षेत्र के ५१ प्रतिशत मतदाताओं का आर्शिवाद प्राप्‍त होगा। तीन से तीस प्रत्‍याक्षियों के मध्‍य मत विभाजन कैसे करें और इसका लाभ कैसे उठाये।
    २. बहुसंख्‍यक से महत्‍वपूर्ण एक दो व्‍यक्तियों का अहम है यदि बहुसंख्‍यक दो भागों में बटें हो तो एक व्‍यक्ति इस लोकतन्‍त्र का भाग्‍यविधाता होता है जैसे झारखंड में बनाये गयें मुख्‍य मंत्री।
    ३. राजनिति स्‍वयं में एक पैशा है इसकी अस्‍वीकृति बडी संख्‍या में दूसरे पैशों से सेवानवृति के बाद इस और आकृष्‍ट करती है प्रधान मंत्री मनमोहन सिह हो या यशवंत सिन्‍हा इन लालफिताशाहों ने राजनैतिझयों की असफलता का भरपूर लाभ उठाया है।
    ४. प्रतिकात्‍मक रूप में लोक सभा की सदस्‍यता प्रजातंत्र में व्‍यक्ति की भागे दारी सुनिशचित करती है , मनमोहन सिहॅ का पहले तो लालफिताशाह होना तथा फिर लोक सभा का सदस्‍य न होना दो बिल्लियों के बीच एक बंदर के फायदे से ज्‍यादा कुछ नहीं है।
    ५. दागी मंत्रियों का मामला भी इस लोक तन्‍त्र की अपरिपक्‍वता को ही बताता है।
    ६. लोक सभा के स्‍पीकर का आ
    चरण
    इस लोकतन्‍त्र की हिपोक्रेसी को इस विशवास मत के समय सबके सामने ले आ
    या है।

    पता नहीं क्‍यों इस लोक तन्‍त्र पर इतना गर्व है। और यह गर्व ही आगे सुधार की संभावनाओं को बंद किये हुए है ।

  14. 14 ashwani kumar

    क्या सिंह वास्तव में किंग है ?
    संसद में आज जो हुआ उस पर आप सब क्या सोचते हैं, क्या सरकार वास्तव में विश्वास मत जीती है ?
    क्या ये लोकतंत्र है या फिर नोट तंत्र ?
    सभी के विचारों का स्वागत है .

  15. 15 sanjeev

    लोक सभा ​नियमों के अनुसार पार्टी व्‍हीप का उल्‍लंघन करने पर सदस्‍य को सदन की सदस्‍यता खोनी पडती है तो क्‍या समय पर न्‍याय होगा तथा कम से कम अगले सत्र से पहले ऐसे सभी सदस्‍यो को सदन से बाहर ​किया जायेगा जो पार्टी व्‍हीप का उल्‍लंघन कर चुके हैं ऐसे में ​विपक्ष का अ​विश्‍वास प्रस्‍ताव ​फिर पक्ष के ​लिए मुश​किल नहीं खडी कर देगा। इस ​लिए स्‍पीकर इस मामले में फैसला नही देगें ​जिससे सत्‍ता धारी को फायदा होता है ।

  16. 16 sanjeev

    करांत जी गर्व से कहते हैं की काग्रेंस ने उनके एमपी तौडने का प्रयास नही ​किया क्‍यो​कि वो जानते है हमारे एम पी टूटने वाले नहीं ले​किन जरा सोचो स्‍पीकर को तो वो पहले ही तौड चुके है कामरेड ​किस बात का गर्व कर रहे हो हमाम में सब नंगे हैं।

  17. 17 sanjeev

    मेरे श
    हर में पहले जब ​बिजली की कमी होती थ
    ी तो सबसे पहले एसी वातनाकुलन त​था ​​नियोन साईन बोर्ड को बंद करवाया जाता था ले​किन इस बार ऐसा नहीं है वातनाकुलन त​था ​​नियोन साईन बोर्ड खुब चल रहे है क्‍योकी सरकार ऐसे ही तो जनता को बतायेगी की ​बिजली की कमी को कैसे वे न्‍यूकलीयर डील से पुरा करेगें।

  18. 18 sanjeev

    बहन मायावती जी हम आपको अवश्‍य ही भारत का प्रधानमंत्री देखना चाहते है । आप द​लित की लडकी तो है साथ ही ला ग्रेजुवेट भी है। १७ एम पी से जब ११७ हो जायेगे तो जरूर ले​किन अभी अगर बन भी गई तो देवगौडा जैसा हाल होगा न घर के न घाट के। बस करीब १७७ ​दिन का इंतजार और अब आपकी बारी है ११७ आपके ७७ लेफट के १७ चन्‍द्र बाबु जी के ७ तेलंगाना के और आप देवगौडा से ज्‍यादा उम्‍मीद मत रखना .७ भी नहीं आयेगें!
    हॉं आपके नाम में अग्रेंजी का आर नहीं ​दिखता आज तक कोई भी प्रधान मं.त्री ​बिना आर के नही बना जरा नाम में आर डाल लें। अगर ज्‍यो​तिष में ​विश्‍वास है तो।

  19. 19 sanjeev

    आने वाले ६ माह में सरकार पेंशन सुधार और वो सभी ​बिल लाना चाहेगी ​जिसे लेफट ने रोक रखा था । बीमा में ऐसा ​बिल वर्ष २००० में लाया गया था। क्‍या ​पिछले आठ वर्ष में सरकार बीमा क्षेत्र में ग्रामीण सामा​जिक बाध्‍यताओं को अपने वायदे के अनुसार पुरा कर सकी हे अन्‍यथा यह अगले ६ माह बीजेपी के इं​डिया शय​निग से अलग नहीं होगे।

  20. 20 Shrivastava, up

    Nuclear deal me kya khash hai media ko janta me spastha batani chahiye.

  21. 21 Madhusudan Uvach

    कितने वर्षोंसे परमाणु संधि का प्रारुप शासनके पास पडा हुआ था। उसको गुप्त रखा गया। क्यों? क्यों उसपर लोकसभामे चर्चा नहीं कराइ? मनमोहन सिन्घ और बुशके मध्य जो गुप्त मन्त्रणाए हुइ उसे प्रकाशित करें? भारत एक विश्वसत्ता है, उसे निलाम करनेका प्रयास नेहरु-गांधी परिवारने पहलेभी किया है। जनता इसे क्षमा नहीं करेगी। इतनी अनाडी भारतकी जनता नहिं है।
    जिस सन्धिके विषयमे पूरी जानकारी, चर्चा, विचार, विमर्श,३ वर्षोंसे –समय होते हुएभी नही करवाया, उसे जल्दी, जल्दीमे, सॉन्सदोंको धनके लेन देन से जुटाने का प्रयास किया गया। कन्ग्रेस को लज्जा आनी चाहिए।

  22. 22 sanjeev

    कैसे भारत एक साफ्ट स्‍टेट है।

    प्रधान मंत्री कार्यालय को एक व्‍य​क्ति सतेन्‍द्र दुबे ​बिहार से एक पत्र भेजते है वह न केवल प्रधान मंत्री कार्यालय से ​लीक होता है वरन सतेन्‍द्र दुबे की हत्‍या हो जाती है ऐसे राष्‍ट्र में लोगों का सरकार को मदद करना कैसे संभव है। इस प्रकार भारत को साफ्ट स्‍टेट बना ​​दिया गया है।

  23. 23 vipin sahu

    कोई भी देश परफेक्ट नहीं होता उसे परफेक्ट बनाना पड़ता है , नेता बनेंगे IAS ,IPS बनेंगे राजनीती में जायेंगे .
    ये में कोई भासन नहीं दे रहा हु ये है रंग दे बसंती मूवी का डायलोग.
    कई महीनो सालो से चल रही नुक्लीयर डील कुछ ही समय में संपन्न होने जा रही है . और हमारे नेताओ ने कई प्रकार के भासन दिए दावे किये.कोई भी डील हमारे लिए सौ प्रतिशत सही हो एसा संभव नहीं हो सकता .और ये बात जरुरी है की हम उस डील के बारे में जाने की उसमे क्या सही है क्या गलत.
    हमें चाहिए की हम जाने की उस डील के बारे में हमें पूरी जानकारी हो .
    ये नेता लोग उस डील के बारे में कितना जानते है जो इस डील के लिए लड़ रहे है इन नेताओ को हमने ही चुना है हमने ही उन्हें उस जगह पहुचाया है जहा से वो हमारे लिए इसे निर्णय लेते है. ये नेता तो कुछ सालो में बदल जायेंगे और उस डील के अछे बुरे परिणामो का सामना तो हमें ही करना होगा हमें ही झेलना होगा.
    हमने जिन नेताओ को चुना है उनका ही ये फ़र्ज़ बनता है की हमें उस डील के बारे में पूरी जानकारी दे. उस डील के सभी पहलुओ पर हमसे चर्चा करे उन सभी पहलुओ को आम जनता के सामने रखे. खुद आगे आकार न्यूज़ चेनलो पर पेपरों में छपवाकर , यदि वो चाहे तो आम सभा आयोजित कर सकते है . दुसरे काम जैसे की हड़ताल या प्रदर्शन करना हो तो कभी भी कही भी शुरू हो जाते है ऐसे कामो के लिए तो सड़क पर लोटने को तैयार हो जाते है. पर जहा सभी की भलाई हो उन कामो के लिए कभी भी आगे नहीं आते है. यदि ऐसे ही हालत रहे तो वाही होगा जैसा रंगदे बसंती में हुआ था चार लोग (युवा) किसी खडूस नेता को मरेंगे और अपना जुर्म काबुल करेंगे. पर एसा होने ही क्यों दिया जाये. हमें चाहिए की नेताओ को बताये की उनका क्या कम है आज कल की राजनीती में वो अपना कम भूल गए है.

    विपिन साहू (20)
    इंदौर

  24. 24 sudhakar mishra

    hello

Leave a Reply

(Antispam code, 3 black symbols)
captcha image