राहुल द्रविड़ दब्बू कप्तान हैं?
Published by शेखचिल्ली June 13th, 2006 in क्रिकेट.वाह, क्या बात है!! ब्रायन लारा अम्पायर के हाथ से गेंद छीन लेते हैं, धोनी को मैदान से चले जाने का हुक्म दे देते हैं और भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ क्या करते हैं? क़ुछ नहीं!!!! ऊपर से पारी घोषित कर देते हैं।
फिर मैच के अगले दिन अम्पायर सेहवाग पर “अधिक अपील” करने के कारण जुर्माना लगा देते हैं, और राहुल द्रविड़ क्या करते हैं? कुछ नहीं!!! क्या सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान होते तो अपने खिलाड़ियों के साथ इस तरह का अन्याय बर्दाश्त करते?
मेरे ख्याल से अगर सौरव टीम के कप्तान होते तो वे द्रविड़ की तरह पेवेलियन से नज़ारा देखने के बजाय बीच मैदान में जा कर लारा की ऎसी की तैसी कर देते। द्रविड़ भले ही कितने हे “भलेमानुस” क्यों न हों, इस तरह का बरताव उन्हें “दब्बू” कप्तान ही अधिक साबित करता है।
पहले धोनी को और फिर सेहवाग को मुसीबत में अकेला छोड़ देना भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान को शोभा नहीं देता।
सौरव गांगुली को वापस बुलाओ!!!!!!
दब्बू? अरे द्रविड़ तो सबसे चतुर कप्तान हैं। देखो ना, कैसे चैपल की चमचागीरी करके सौरव को टीम से निकलवा दिया और खुद कप्तान बन गये। अरे, सौरव इतने ही चतुर होते तो अपनी कप्तानी नही बचा लेते? वैसे, सौरव हैं कहां? बहुत दिनों से उनकी कोई खबर नहीं मिली है?
भई, क्यों झगड़ा करते हो। जो हो गया, सो हो गया। चलो, सचिन को कप्तान बना दो, बेचारा कब से राह देख रहा है टीम में वापस आने की। क्या पता, कप्तान बना देने से उसकी चोट ठीक हो जाये… हे भगवान.. सचिन की मदद करना।
Dravid dont try to become Gandhi…… but he dont no that, to become Gandhi is as simple as to drop a catch… but to become a captain is as tuff as to handle yr wife….
देखो भई द्रविड़, सभी तुम्हें भारतीय टीम की मजबूत दीवार कहते हैं। अगर इसी तरह तुम चैपल के इशारों पर चलते रहोगे तो लगता है सिर्फ दीवार बनकर रह जाओगे। और कहीं एक दिन ऐसा न आए जब तुम्हारे नीचे का ज़मीन खिसका दी जाए और ये मज़बूत दीवार ढह जाए। इसीलिए मेरी मानो और दिमाग की बत्ती जलाओ और अपनी अक्ल लगाओ।
दादा आपकी बहुत याद आती है, प्लीज भगवान के लिए वापस आ जाइये। हम सबको आपका इंतजार है। क्रिकेट को धर्म मानने वाले और उसे जुनून की हदतक चाहने वाले इस देश को आप जैसे आक्रामक रवैये वाले कप्तान की सख्त जरूरत है। जब आप कप्तान थे तो किसी कि क्या मजाल की कोई आपको या आपकी टीम को कुछ उल्टा-सीधा कहे और आपसे बच कर निकल जाये। याद हैं हमें वो सारे किस्से…
आप हमेशा ही अपने खिलाड़ियों का साथ देते थे और किसी से भी पंगा लेने के लिए तैयार रहते। आपके भरोसे ही तो एक अरब की आबादी वाला यह देश अपने खिलाड़ियों को बाहर भेजता था।
लेकिन आज हालत यह है कि टीम इंडिया के कप्तान “मिस्टर कूल” सही होने के बावजूद अपने खिलाड़ियों का साथ नहीं देते, और न केवल उन्हें मंझधार में अकेला छोड़ देते हैं, उपर से पेवेलियन से इशारा करते हैं कि वापस आ जाओ; किसी से भिड़ने की जरूरत नहीं है। बेचारे हमारे क्रिकेटर…
मिस्टर “कूल” का अगर यही रवैया रहा तो हर ऐरा -गैरा नत्थू- खैरा कभी टीम की कदर नहीं करेगा और उसका बस चला तो हमारे खिलाड़ियों को बीच मैदान में दो तमाचे रोज लगायेगा !
इसीलिए प्लीज वापस आ जाइये…
लक्ष्मी
द्रवीड एक अच्छा खिलाडी है लेकिन एक अच्छा कप्तान नही कतई नही!
एक नेता को आक्रामक होना चाहिये, जो द्रवीड नही है! गांगूली सिर्फ अपनी कप्तानी की बदौलत कप्तान बने रह सकते है
ise rahul dravir ka dabbupana kahana sahi nahi hoga. kisi ke sar par yu hi to kaptaani ka taaj nahi jar diyaa jata. shayad sahi mauke kaa intajaar hi rahul ki quality ho. jahaan tak saurabh ki baat hai ye kaha jaa sakta hai ki uske bagair team india filhaal naakafi najar aati hai.