‘भेजा फ्राई ‘ ने किया सबको धराशाई
Published by शेखचिल्ली June 5th, 2007 in फ़िल्में.तूलिकामोहन को हिंदी फिल्म “भेजा फ्राई” बहुत पसंद आई। क्यों, पढ़िए उनके ही शब्दों में:
आज के जमाने में जहां एक ओर बॉलीवुड की फिल्में एक-दो हफ्ते ही ठीकठाक कारोबार करके बक्से में वापस चली जाती हैं, वहीं ‘भेजा फ्राई ‘ जैसी फिल्म महीनों सफलता का बिगुल बजाकर भी नहीं थकती। फिल्म का शुद्ध हास्य दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देता है।
13 अप्रैल को रिलीज हुई “भेजा फ्राई” के बाद अब तक जाने कितनी ही हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्में बॉक्स ऑफिस पर आकर वापस भी चलती बनीं, लेकिन महज 50 लाख रुपए के बजट से बनी यह फिल्म टिकट खिड़की पर आज भी जमकर खड़ी है।
विनय पाठक, रजत कपूर, मिलिंद सोमन और सारिका के स्वाभाविक अभिनय से सजी इस फिल्म ने कम से कम बॉलीवुड की उस धारणा को तो झुठला ही दिया है जिसके तहत किंग खान, बिग बी या करन जौहर जैसी बड़ी हस्तियां ही फिल्म को हिट कराने के लिए जरूरी हैं।
और तो और यह भी सीख दे दी है कि अगर अपनी फिल्म को सफल फिल्म का तमगा पहनाना है तो मंहगे कलाकारों, सेट, कॉस्ट्यूम, गानों और संगीत पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाने से अच्छा है फिल्म की पटकथा पर विशेष ध्यान दिया जाए, जैसा कि “भेजा फ्राई” के निर्माता और निर्देशक ने किया।
इसी शानदार पटकथा, विनय पाठक की बेजोड़ कॉमेडी और निर्देशक की फिल्म पर मजबूत पकड़ के बलबूते ही फिल्म अब तक 12 करोड़ रुपए से भी अधिक का कारोबार कर चुकी है। यही नहीं इसने ‘लाइफ इन ए मेट्रो ‘, ‘ शूटआउट एट लोखंडवाला’ , ‘तारा रम पम ‘ जैसी तमाम फिल्मों को धराशाई करके खुद को साल की सबसे सफलतम फिल्मों की सूची में शुमार कर लिया है।
yes, it so beautiful Movie in 2007
Bakwas 3rd class picture
good movie only for Samjhdar darshako keliye aur multiplex ke liye hi bas