पाकिस्तानी कोच बॉब वूल्मर की विश्व कप से टीम के बाहर होने के दूसरे दिन ही मौत से इस प्रतियोगिता के बुरे क्षणों में एक और इजाफा हो गया है।

2007 के इस क्रिकेट विश्व कप में भारतीय उपमहाद्वीप की दो प्रमुख टीमों, भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट जगत में विश्वकप की शुरुआत से पहले ही खिलाड़ियों के चयन और उनकी फिटनेस को लेकर तरह-तरह के विवादों ने माहौल बिगाड़ रखा था।

अगर पाकिस्तान में शोएब अख्तर जैसा खिलाड़ी “डोप टेस्ट” में असफल रहा और टीम से बाहर रहा, तो भारत में खराब फॉर्म से जूझ रहे विरेन्दर सेहवाग को कप्तान द्रविड की जिद पर टीम में शामिल करना बहस का कारण बना।
दिग्गज समझी जाने वाली ये दोनों टीमें बांग्लादेश और आयरलैण्ड जैसी नन्हीं टीमों से हार गईं। पाकिस्तान विश्व कप से बाहर हो चुका है और भारत के बाहर होने का खतरा है।
आज इन दोनों टीमों की जो दुर्दशा है, वह खेल में पक्षपात और राजनीति की अंधेरगर्दी के कारण है।

बॉब वूल्मर की मौत शायद यह भी दिखाती है कि इस उपमहाद्वीप में खेल के नाम पर जो राजनीति हो रही है, वह बर्दाश्त करना कितना मुश्किल हो सकता है।



2 Responses to “अभिशप्त क्रिकेट विश्व कप”

  1. 1 नितिन

    आज इन दोनों टीमों की जो दुर्दशा है, वह खेल में पक्षपात और राजनीति की अंधेरगर्दी के कारण है।

    एक बहुत महत्वपूर्ण पक्ष….विश्व कप से जुड़े धन का भी है…
    जहाँ एक तरफ भारतीय खिलाडी विज्ञापनों की बाढ में बहने के लिए बदनाम हैं वहीं पाकिस्तानियों पर मैच फिक्सिंग का बादल छाया रहता है…
    अपनी दुकान चलाने के चक्कर में मीडिया भी खिलाडियों को भगवान का दर्जा दे देता है और खेल को देशभक्ति का….और उपभोक्तावाद के शिकार हम भारतीय मान लेते हैं कि हर चौक्के के साथ देश की तरक्की हो रही है…

    इन दोनों टीमों के हारने से किसी देश की कथित इज्ज़त कम नहीं होगी…हाँ कुछ व्यवसाय समूहों, सट्टाबाज़ों और टीवी चैनलों की आमदनी पर असर ज़रूर पड़ेगा.

  2. 2 sanjay patel

    टोतल धंधेबाज़ी है महाराज ! सब अपनी अपनी दुकान चला रहे हैं इंवेट मैनेजमेंट हो रहा शानदार…हम भारतवासी बडे़ आदरभाव से देख रहे हैं ये कथा.क्रिकेट की सात्विकता को हड़प किया गया है….हाइजैक कर लिया गया है.सब कुछ एक तयशुदा स्कीम के अंतर्गत हो रहा है.कितना ही ढोल बजाइये…चिल्लाइये ..बेशर्मों को कोई फ़र्क़ पड़्ने वाला नहीं है.मुझे तो लगता है भारतीय क्रिकेट को भारतीय सेना के हवाले कर देना चाहिये और बीसीसीआई का सदर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भारत के राष्ट्रपतिजी को बना देना चाहिये और इस पद का स्वनंत्र प्रभार उन्हे सौंप देना चाहिये …इसके अलाव चोट्टाई रोकने का और कोई इलाज नहीं हो सकता.खेल में इस क़दर राजनीति होगी सोचा न था..अंग्रेज़ी कोच खरीदने से ज़्यादा अच्छा होग कि हम कुछ विदेशी खिलाडी ही ख़्ररीद लें.भाडे़ के टट्टू परफ़ार्म न करेंगे तो टीम के बाहर तो निकाल सकेंगे न..सहवाग जैसे ढोना तो नहीं पडे़गा न उन्हो को.

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