नयी हिंदी फिल्मों में स्त्री
Published by शेखचिल्ली March 9th, 2007 in फ़िल्में.
पिछले दिनों कुछ नयी हिंदी फिल्मों में जिस तरह स्त्री पात्रों का परिवार में स्थान दिखाया गया है, उससे हमें चिंता होने लगी है।
इन फिल्मों के मुताबिक जो स्त्री शादी के बाद बच्चों को संभालने में व्यस्त रहे, मोटी हो जाए, उसकी उम्र बढ़ जाए या वह अपने करियर में सफल हो, उसके पति को उसे छोड़ कर पर-स्त्रियों से संबंध बना लेना चाहिए और इसके लिए वह सहानुभूति का पात्र भी होना चाहिए।
सबसे पहले लीजिए “निशब्द” की बात। फिल्म में अमिताभ बच्चन और रेवती पति- पत्नी हैं। फिल्म इस बात को बार-बार रेखांकित करने की कोशिश करती है कि रेवती मोटी हो गई है, बहरे नौकर पर चिल्लाती रहती है, करीने से कंघी-चोटी में नहीं दिखती, उसके बाल सफेद हैं, रसोई में व्यस्त रहती है और “सास-बहू” धारावाहिक देखती रहती है। प्रकारांतर से फिल्म यह साबित करने की कोशिश करती है कि ऎसी पत्नी होने के कारण ही उसका 60 वर्षीय पति, एक 18 वर्षीय लड़की से प्रेम करने लगता है।
लगभग यही बात फिल्म “सलामे इश्क” में अनिल कपूर- जूही चावला के पात्रों में दिखाई गई है। घर में सबकुछ है लेकिन अनिल कपूर को कुछ “नया” चाहिए जो उसे अपने दो बच्चों की मां में नहीं मिल रहा, इसलिए वह किसी और से इश्क करने लगता है।
इससे पहले आई फिल्म “कभी अलविदा ना कहना” में शाहरुख खान का पात्र कुंठित हो कर घर बैठा रहता है, लेकिन जब घर का खर्च चलाने वाली पत्नी अपने करियर में उन्नति करती है तो उसे ताने मारता है कि उसके पास घर के लिए समय नहीं है। फिल्म, रानी मुखर्जी के पात्र से उसके विवाहेतर संबंध को यही कारण दिखा कर उचित ठहराने की कोशिश करती है कि काम में व्यस्त रहने वाली पत्नी के कारण वह दूसरी स्त्री से अवैध संबंध बनाता है।
इन फिल्मों की मानें तो “मां” एक बदसूरत और घर से निकालने या छोड़ देने योग्य प्राणी है। “पिता” और कुछ नहीं बल्कि हमेशा जवानी की तलाश में रहने वाला पुरुष है और नौकरी करने वाली हर पत्नी, जरूर अपने पति- घर की उपेक्षा करती है।
इसलिए, इन फिल्मों के मुताबिक अगर पुरुष विवाहेतर संबंध बनाता है तो उसकी जिम्मेदार उसकी पत्नी होती है, वह नहीं।
आश्चर्य है कि बड़े -बड़े फिल्मकारों की फिल्मों में नारी पात्रों के इस तरह से चित्रण के खिलाफ कोई आवाज़ भी नहीं उठती?
आपके फीड मे दिक्कत है, इसी वजह से आप नारद पर नही दिख रहे है।
प्लीज अपने फीड को ठीक करिए।
-जीतू
Sorry i don’t have hindi key board!
This is the difference of Biological structures of Man and women.Man never satisfied they have a urge until there 80’s but women don’t.
This is not the MAN and WOMEN issue this is natural isuue.