इंडिया शाइनिंग: किसके लिए?
Published by शेखचिल्ली February 19th, 2007 in नया भारत.
हमारे एक मित्र ने कल एनडीटीवी पर आए एक कार्यक्रम के बारे में बताया जिसमें महंगाई पर चर्चा की गई थी। कार्यक्रम में किसी ने टिप्पणी की थी कि “विलासिता की वस्तुओं के दाम सालों-साल नहीं बढ़ते लेकिन दाल-चावल- सब्जी के भाव दिन- दूने रात चौगुने बढ़ते रहते हैं।”
बात पते की है।
कारों के दामों में पिछले 5 वर्षों में कितनी वृद्धि हुई है? और कितने बढ़े हैं प्याज के दाम पिछले 5 वर्षों में?
कितनी बढ़ी है आम नौकरीपेशा व्यक्ति की तनख्वाहें और कितनी बढ़ी है महंगाई?
जिस भारत की आर्थिक समृद्धि के गीत गाए जा रहे हैं उसका अंदरूनी हाल यह है कि मुंबई जैसे शहर में बिजली कटौती की बात चल रही है।
फिर किसके लिए है यह इंडिया शाइनिंग?
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