सलाम मुंबई
Published by शेखचिल्ली July 12th, 2006 in मुंबई में धमाके.यह चिट्ठा हमारे एक मित्र, चेतन पटेल, ने लिख कर भेजा है। चेतन, मुंबई के उपनगर जोगेश्वरी के रहने वाले हैं और कल (11 जुलाई को) उनकी मां उसी लोकल ट्रेन में थीं जिसमें उपनगर बांद्रा में बम विस्फोट हुआ था। सौभाग्यवश, उन्हें कोई चोट नहीं आयी और वे कई किलोमीटर पैदल चल कर अपने घर पहुंच गयीं।
चेतन खुद रात के एक बजे घर पहुंचे और उसके बाद जोगेशवरी स्टेशन का जायजा लेने गये जहां कल शाम बम विस्फोट हुआ था। वहां की हालत देख कर उनसे कल खाना नहीं खाया गया।
लेकिन, कल रात जिस मुंबई को उन्होंने देखा, महसूस किया, वह यहां उनके ही शब्दों में हाजिर है-
11 जुलाई 2006 को मुंबई ने फिर साबित कर दिया कि यहां के निवासी सच्चे “मुंबईकर” हैं।
क्योंकि मुंबई में अधिकतर लोग अलग-अलग शहरों और देशों से आकर रहते हैं। मुंबई एकमात्र ऎसी जगह है जहां विभन्न जातियों के लोग रहते हैं लेकिन कोई इसकी परवाह नहीं करता। क्योंकि लोग यहां सिर्फ एक जाति को मानते हैं- मुंबईकर (मुंबई का रहिवासी)।
11 जुलाई ऎसा दिन था जब मुंबई के वेस्टर्न लाइन पर चलने वाली लोकल ट्रेनों में बम विस्फोट हुए और उस समय वहां घायलों की मदद के लिये सबसे पहले न तो पुलिस पहुंच पायी, न डॉक्टर। सिर्फ आम लोग वहां दौड़ पड़े थे मदद करने के लिये, बिना यह देखे कि सामने वाला किस धर्म का है।
कई इलाकों में गैर-हिंदुओं ने घायलों की मदद की जिसका मतलब है कि वे सिर्फ मुंबईकर हैं, वे सिर्फ एक धर्म का पालन करते हैं, वह है मुंबईकर होना। बम विस्फोटों के बाद लाखों लोग सड़कों पर ट्रैफिक में फंसे थे और उस समय केवल आम आदमी ने उनकी मदद की, कभी पानी, कभी चाय तो कभी खाने-पीने की वस्तुएं बांट कर।
रेल्वे ने ट्रेनों की सेवा वापस शुरू करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। मुंबई के 7 क्षेत्रों में उन्होंने ट्रेनों, पटरियों और ट्रेन चलाने के लिये ज़रूरी बिजली के तारों की उसके लोगों ने बहुत, बहुत मेहनत की और रातों-रात मरम्मत कर साबित कर दिया कि वे इतना बड़ा काम कुशलता से कर सकते हैं।
12 जुलाई की सुबह सारी लोकल ट्रेनें पटरियों पर थीं। इसका मतलब है कि 7 बम विस्फोट होने के बाद रेल्वे सिर्फ 8 से 9 घंटों के अंदर सारी मरम्मत पूरी कर ट्रेनें शुरू कर दीं।
11 जुलाई को मुंबईकरों ने दिखला दिया कि मुंबई दुनिया का सबसे “असभ्य” शहर नहीं है… हम सबको मुंबईकर होने पर गर्व होना चाहिये क्योंकि यहां अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं फिर भी वे एक ही जाति में आते हैं - मुंबईकर की जाति में।
6 Responses to “सलाम मुंबई ”
- 1 Pingback on Jul 12th, 2006 at 7:51 pm
- 2 Trackback on Sep 30th, 2008 at 6:48 am
- 3 Trackback on Oct 3rd, 2008 at 4:12 am
सलाम मुम्बई
!! सलाम मुंबई too !!
salam india “kyon ki we r indian”