अखबारों में खबरें हैं कि दक्षिण अफ्रीका तक के खिलाड़ी पूछने लगे हैं कि सौरव गांगुली कब भारतीय टीम में शामिल होने आ रहे हैं।
यह दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट टीम की दुर्दशा से पूरे क्रिकेट जगत में चिंता है और यह भी, कि सौरव की क्रिकेट जगत में अब भी कितनी इज्जत की जाती है।
आज हालत यह है कि बच्चे भी कहने लगे हैं कि सौरव को टीम का कप्तान होना चाहिए। इसलिए नहीं कि वे बल्लेबाजी में कोई तीर मार रहे हैं। उसमें तो वे उतने ही ढुलमुल हैं जितने भारतीय क्रिकेट टीम के बाकी सिकंदर, लेकिन इसलिए कि टीम को उनकी कप्तानी में जो इज्जत, आत्मविश्वास और कप्तान का समर्थन हासिल था वह द्रविड़-चैपल के इस घोर कलियुग में नहीं है।

आज भारतीय टीम को मैदान में देखिए, कैसे हताश चेहरे और झुके कंधों वाली हालत उनकी दिखाई देती है। ग्रेग चैपल ने इस टीम की यह मानसिक हालत कर दी है कि हर खिलाड़ी के मन में डर समा गया है कि पता नहीं कल वह टीम में रहेगा या नहीं।
बात यह नहीं कि ग्रेग चैपल अच्छे कोच हैं या नहीं। बात यह है कि वे लगातार साबित कर रहे हैं कि वे अच्छे इनसान नहीं हैं और उनका यही लक्षण भारतीय क्रिकेट टीम को बर्बाद किए दे रहा है।
सौरव ऎसे आक्रामक कप्तान थे जो अपनी टीम और अपने खिलाड़ियों के लिए किसी से भी, कभी भी भिड़ने के लिए तैयार रहते थे। राहुल द्रविड़ अच्छे इंसान हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश एक आक्रामक खेल में “निरीहता” अच्छी कप्तानी का लक्षण नहीं मानी जाती।

बेहतर होगा कि द्रविड़ कप्तानी छोड़ कर टीम के मजबूत बल्लेबाज की ही भूमिका निभाएं।



1 Response to “सौरव आए, अब चैपल को निकालो”

  1. 1 Lakshmi Singh

    दादा की जय हो…। जिसका मुझे था इंतजार वो घड़ी आ गई….। चैपल अब तुम अपने उल्टे दिन गिनने शुरू कर दो। क्योंकि भारत का शेर अफ्रीकी जंगलों में पहुंच चुका है। मेरी मानों तो दक्षिण अफ्रीका से ही उल्ट पांव ऑस्ट्रेलिया दबक लो। शेर के हाथ लग गए तो तुम्हें कोई नहीं बचा सकता। सब कुछ तो तुमने बर्बाद कर दिया है इसलिए चुपके से इस्तीफा दो और पतली गल्ली से निकल लो। “मैन इन ब्लु” सुबह हो गई मामू….।

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