पहले हम भारत को सोने की चिड़िया कहते थे। मुगलों और अंग्रेजों ने कब्जा जमाकर सारी धन-दौलत को लूट लिया था। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल अलग है। व्यापारिक जगत में जिस पैमाने पर भारतीय कंपनियों ने अधिग्रहण का सिलसिला शुरू है दुनिया के सभी विकसित देशों को अब भारत से खतरा महसूस होने लगा है।
टाटा स्टील का अंग्रेजी कम्पनी कोरस को 100 प्रतिशत हथियाने के लिए नीलामी लगाना, इंडियन ऑयल का तुर्की में संयंत्र स्थापित करने की योजना, रिलायंस इंडस्ट्रीज का स्कॉटलैंड की ऊर्जा कम्पनी वुड समूह को खरीदना, विडियोकॉन का डेवू इलेक्ट्रॉनिक्स को खरीदना, ग्लेनमार्क का विदेशी कम्पनी मर्स्क को लाइसेंस देना………उफ्फ्फ्फ्फ फेहरिस्त तो कहीं खत्म होती दिख ही नहीं रही।

भारत की अर्थव्यस्था की मजबूत हालत का अंदाजा इसी फेहरिस्त से लगाया जा सकता है। अब इसे उल्टी गंगा बहना कहें या कहें कि अब सीधी गंगा बहना शुरू हुई है।



2 Responses to “उल्टी गंगा बहने लगी है ”

  1. 1 Lakshmi Singh

    गंगा उल्टी बहे या सीधी सबसे ज्यादा अगर कोई बात मायने रखती है तो वह है कि “गंगा बह तो रही है।”

    भारतीय अर्थव्यवस्था के दिन-ब-दिन मजबूत होने का सारा श्रेय दुनिया के जाने-माने “इकोनॉमिस्ट” प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ उनकी बटालियन को जाता है। साथ ही योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया और वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की तारिफ करनी होगी।

    कम-से-कम मेरा तो यही मानना है।

  2. 2 Surendra Bhilwal

    Ji Nahi aap ka manna bilkul galat hai
    Iska sara sherya carporate jagat ko jata.

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