कराची के प्रतिष्ठित अखबार “डॉन” ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ की किताब “इन द लाइन ऑफ़ फ़ायर” के अमेरिका में जारी किये जाने पर अपने संपादकीय में यह राय जाहिर की है:

 “राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के बहुचर्चित संस्मरण “इन द लाइन ऑफ़ फ़ायर” को कई उन बातों के लिये गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज किया जाना चाहिए जो यह किताब “पहली बार” करने का श्रेय हासिल करने जा रही है। शायद पहले किसी किताब के प्रचार पर इतना पैसा खर्च नहीं किया गया, जिसमें से अधिकतर जनता का पैसा था- जितना कि राष्ट्रपति की आत्मकथा पर। यद्यपि उनकी यात्रा को अमेरिका की आधिकारिक यात्रा प्रचारित किया गया था, लेकिन यह यात्रा अब उनकी किताब का प्रचार अभियान ही नज़र आ रही है।

शायद ही किसी लेखक को 70 साथियों (जिनमें से 10 केंद्रीय मंत्री थे) के साथ ऎसे (किताब जारी करने के) किसी मौके  पर यात्रा करने का सौभाग्य मिला हो। ऎसे में यह सोचना गलत नहीं होगा कि अमेरिकी टीवी पर राष्ट्रपति द्वारा “बमों से पाट दिये जाने” की अमेरिकी धमकी का बहुचर्चित जिक्र भी किताब के बारे में उत्सुकता बढ़ाने के लिये किया गया था। राष्ट्रपति मुशर्रफ द्वारा इस बात का अधिक खुलासा किये जाने से इनकार करने पर राष्ट्रपति बुश ने सही कहा कि “उनका कुल जमा कहना यह है कि किताब खरीदिये।” किताब के प्रकाशक भी तो उस टीवी चैनल के मालिक हैं जिस पर मुशर्रफ ने यह बयान दिया था। अगर कोई सत्ताधारी राष्ट्रपति राजनीति, रणनीति और विदेशनीति पर आत्मकथात्मक किताब लिखे तो उसका गंभीर राजनीतिक पहलू होता है।
क्या राष्ट्रपति को ऎसे राष्ट्रीय रहस्यों का खुलासा करने का अधिकार है जो कानूनन 30 वर्षों तक बाहर नहीं लाए जा सकते? जाहिर है, उनकी बातें एकपक्षीय होंगी और जिन बातों के बारे में उन्होंने लिखा है वे पुख्ता सबूत तथा दस्तावेजों के अभाव में विवाद को जन्म देंगीं। इससे भी बुरी बात तो यह है कि हर-एक शब्द देश की नीति तथा विदेशी संबंधों पर गहरा असर डालेंगे क्योंकि ये रहस्योद्घाटन राष्ट्रपति की कलम से किये गये हैं। मौलाना आज़ाद (अबुल कलाम) लिखित शब्दों के असर से बखूबी वाकिफ़ थे। इसीलिये उन्होंने अपनी किताब “भारत ने जीती आज़ादी” के प्रकाशक को निर्देश दिया था कि उनकी मौत के 30 वर्षों बाद तक किताब के कुछ विवादास्पद अंश प्रकाशित न किये जाएं।



11 Responses to “मुशर्रफ की किताब: पाकिस्तानी गुस्सा”

  1. 1 SHUAIB

    पाकिस्तान को अंधेरा करने मे अमेरिका का पूरा हाथ था। अगर उर्दू पढना आता तो ये भी पढ लेते: http://shuaibday.blogspot.com/2006/09/34.html

  2. 2 संजय बेंगाणी

    एक देश के तानाशाह द्वारा मात्र किताब बेच कर पैसे कमाने के लिए ऐसे विवाद पैदा करे यह बात गले नहीं उतरती.

  1. 1 DesiPundit » Archives » मुशर्रफनामा
  2. 2 Meridia.
  3. 3 Percocet alieve.
  4. 4 Ultram withdrawal.
  5. 5 Xanax.
  6. 6 Propecia.
  7. 7 Tramadol.
  8. 8 Effexor.
  9. 9 Percocet.

Leave a Reply

(Antispam code, 3 black symbols)
captcha image