कल ख़बर देखी कि भारतीय क्रिकेट टीम का बैंगलोर में “रोलिंग कैम्प” आरंभ हुआ है।

हमें सिर-पैर समझ नहीं आया किअ यह “रोलिंग” क्या बला है।

हमें लगा, जैसे श्रीलंका दौरे से पहले क्रिकेट टीम को कमांडो ट्रेनिंग दी गयी थी, उसी तरह का कोई नया फंडा

 अरे जोएल, ग्रेग चैपल

 से मिले कि नहीं?

होगा। शायद खिलाड़ियों को सिखाया जाएगा कि  कैच लेते समय, रन आउट होते समय कैसे जमीन पर लुढ़कें।

फिर पता चला कि यह प्रशिक्षण गुरु ग्रेग चैपल के दिमाग की उपज है( सिर्फ उन्हीं का दिमाग इतना उपजाऊ है)। इसमें एक “रोलिंग मशीन” से ऊंचाई से गेंद फेंकी जाती है ताकि भारतीय बल्लेबाजों को लंबे गेंदबाजों की गेंदबाजी खेलने का अभ्यास हो सके। श्री ग्रेग चैपल ( अगर आदर से संबोधित नहीं किया तो कोलकाता पुलिस पकड़ने आ जाएगी) का विचार है कि विदेशी खिलाड़ी ज़्यादा लंबे होते हैं इसलिये भारतीय खिलाड़ी उनकी गेंदबाजी अच्छे से झेल नहीं पाते ( सौरव गांगुली, कुछ इशारा समझे?)।

अच्छा हुआ गुरु ग्रेग ( गुरु जी, नमस्ते) 80 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम के मसीहा नहीं बने। तब वेस्ट इंडीज के एक तेज गेंदबाज हुआ करते थे, जोएल गार्नर। वे 6 फुट 8 इंच लंबे थे!! और जब वे गेंद फेंकते तो उनका हाथ पीछे लगी “साइट स्क्रीन” से भी ऊपर जाता था। जोएल गार्नर टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के सबसे लंबे खिलाड़ी थे। इसी कारण उनका नाम “बिग बर्ड” पड़ गय था। बल्लेबाजों का कहना था कि जब गार्नर गेंद फेंकते तो लगता कि गेंद बादलों से आ रही है।

अगर गार्नर अभी खेल रहे होते तो गुरु ग्रेग क्या करते? शायद वे टीम की प्रायोजक कंपनी सहारा से कहते कि एक हवाई जहाज लाओ और उससे टीम को गेंद डाल कर बल्लेबाजी का अभ्यास कराओ!

 



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