मुंबई में बारिश आने से टी वी चैनल वाले बड़े खुश हैं। कब से बारिश के फ़िल्मी गीत रेकॉर्ड करके रखे थे, पिछ्ले साल की बारिश के फुटेज निकाल कर, धूल झाड़ कर तैयार रखे थे कि इधर मुंबई में बारिश आए और उधर धमाका शुरू। सो सबकी मनोकामना पूरी हो गयी, मुंबई में बारिश आ गयी और हर टीवी चैनल पर बारिश की इतनी भयानक तस्वीरें दिखायी जाने लगी हैं कि स्वयं मुंबई वालों को आश्चर्य हो रहा है कि ये जल-प्रलय हमारे यहां ही हो रही है?
 

हर चैनल पर खबर है कि मुंबई में पानी भर गया है, ट्रेनें देर से चल रही हैं, ऑफिस जाने वालों को दिक्कत हो रही है वगैरह-वगैरह। वे यह बताना छिपा जाते हैं कि मुंबई के निचले इलाकों में पानी भरा है, पूरी मुंबई में नहीं। 


 
अब इन लोगों को कौन बताये कि भैया, मुंबई में बारिश होती है तो निचले इलाकों में पानी भरता ही है, लोग पानी में छपर-छपर करके ऑफिस जाते ही हैं, ट्रेनें देर से चलती ही हैं क्योंकि पटरियों पर पानी भर जाता है। लेकिन इस सबसे मुंबई वाले डर कर घर पर नहीं बैठ जाते। वे काम पर जाते हैं, ट्रेन न चले तो बसों में लटक कर जाते हैं, कई किलोमीटर चल कर पैदल जाते हैं और अगर छुट्टी का दिन हुआ तो समंदर किनारे बारिश में भीगने का मज़ा लेने जाते हैं।

 
इमारतों के इस जंगल में प्रकृति से जुड़ने का एक ही ज़रिया है- बारिश। और मुंबई को साल भर पानी भी मिलता है तो महानगर के आस-पास फैली सात झीलों से जिन्हें बारिश का पानी ही भरता है। इसलिये बारिश चाहे कितनी दिक्कतें लाये, मुंबई वालों को परवाह नहीं। उन्हें तो बारिश चाहिये। 

  
इसलिये अगर आप मुंबई से बाहर रहते हैं और आपके परिजन/ दोस्त मुंबई में रहते हैं तो टीवी देख कर उनकी चिंता मत करियेगा। हो सकता है वे उस उस समय बारिश में भीगे होने के बावजूद ऑफिस में बैठे कटिंग चाय की चुस्कियां ले रहे हों और दोस्तों से बतिया रहे हों कि यार, बारिश हो तो मुंबई जैसी।

  
जो डर-डर कर आये वह मुंबई की बारिश नहीं और जो बारिश से डर जाये वह मुंबईया नहीं!
 

 



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