हम तीनों, यानी मैं, सुपरमैन और इंदिरा गांधी एक जगह पर थे। नहीं, श्रीमती इंदिरा गांधी आने वाली थीं भाषण देने के लिये, मुझे उस घटना की रिपोर्टिंग करनी थी और सुपरमैन तब तक वहां नहीं पहुंचा था। फिर श्रीमती गांधी आयीं और सुपरमैन उनको बचाने के लिये उन्हें ले कर छत तोड़ कर बाहर निकल गया… और उन पर हमला करने वहां पहुंच गया अमेरिका का एक जासूसी विमान– काला, 2 फुट लंबा, बिना खिड़कियों वाला, पायलेट रहित और एक्दम उड़नतश्तरी जैसा… अब क्या होगा?

फिर मेरी नींद टूट गयी।

लेकिन एक बात मुझे अब तक समझ नहीं आयी। माना कि मैने बीती शाम फ़िल्म “सुपरमैन रिटर्न्स” देखी थी और फ़िल्म वाक़ई असरकारी है, इसलिये उसका सपना आना स्वाभाविक था। लेकिन श्रीमती इंदिरा गांधी उस सपने में कहां से आ गयीं? और वह उड़नतश्तरी जैसा अमेरिकी खुफिया विमान?

न मैने कभी श्रीमती गांधी को आमने-सामने देखा और न किसी उड़नतश्तरीनुमा विमान को, फिर मेरे सपने में ये सब इतने सजीव बन कर कहां से उतर पड़े?

अगर सपनों की दुनिया में कुछ भी हो सकता है तो सुपरमैन क्यों, “कृष” क्यों नहीं आया मेरे सपने में? आखिर वह फ़िल्म भी देखी थी मैंने? (क्या इसलिये कि फ़िल्म देखने के बाद मैंने उसकी हंसी उड़ायी थी और वह मुझसे नाराज़ था?…)।

ख़ैर, मुझे ज़्यादा सिर नहीं खपाना चाहिये। सपने में ही सही, श्रीमती गांधी और सुपरमैन से मुलाकात तो हो गयी। 

जानना दिलचस्प होगा कि क्या आपने भी कभी सपनों में बड़ी हस्तियों से मुलाकात की है?



3 Responses to “मैं, सुपरमैन और इंदिरा गांधी ”

  1. 1 आशीष

    फ्रायड को पढे, उन्होने सपनो का अचछा विष्लेशन किया है

  2. 2 प्रेमलता पांडे

    मन के किसी कोने में इस तरह का कोई सुप्त-भाव तो प्रकारांतर से अवश्य रहा होगा जो स्वप्न में जाग्रत हुआ।
    -प्रेमलता पांडे

  3. 3 suresh goyal

    mujhe koi batia ki hindi me kaise lihe?

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