Archive for March, 2009
घड़ी कमर में लटकाऊंगा.. मैं गांधी बन जाऊं..
0 Comments Published by शेखचिल्ली March 6th, 2009 in नया भारत.बचपन में पाठ्य पुस्तक में एक कविता पढ़ी थी, “मां खादी की चादर दे दे , मैं गांधी बन जाऊं।”
कविता में एक बच्चा मां से गांधी जी के जैसी वस्तुएं दिलवाने की मनुहार करता है ताकि वह भी उन्हें लेकर गांधी जी जैसा दिख सके।
उसमें गांधी जी की मशहूर घड़ी का जिक्र था। गांधी जी […]