Archive for November, 2007



किस्सा आमची मुंबई का है।
तीन चोर एक घर में रात को ताला तोड़ कर चोरी के इरादे से घुसे।
मकानवाले थोड़ी देर बाद घर लौटे तो अंदर चोरों को देख कर बाहर से कुंडी लगा दी और हल्ला मचा कर पड़ोसियों को इकट्ठा कर लिया।
बाहर लाठी लिए भीड़ खड़ी देख चोरों के होश उड़ गए […]


तानाशाही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का मुकाबला मुशर्रफ भी नहीं कर सकते।
खिलाड़ी तो मुंह खोल ही नहीं सकते, अब चयनसमिति के अध्यक्ष वेंगसरकर के लेखन पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
याद है, टीम से निकाले गए सौरव की तारीफ करने पर सेहवाग और हरभजन सिंह से बोर्ड ने कैसे सार्वजनिक रूप से कहा […]


स्थानीय अखबारों में देखा करते थे, अक्सर किसी की मृत्यु की सूचना वाले शोक संदेश के ऊपर लिखा रहता था “धल्ले आवे नानका, सद्दे उठ जावे”। पंजाबी नहीं आती थी ( अभी भी नहीं आती) इसलिए न तब इस वाक्य का अर्थ समझते थे, न अब। सिर्फ इतना समझ में आता है कि यह शरीर […]