Archive for February, 2007



रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने आज वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम के आम बजट के बारे में कहा- “ आम लोगों को जीडीपी वगैरह से मतलब नहीं है, उन्हें इस बात से मतलब है कि उनकी दाल-रोटी सस्ती हुई या नहीं।”
आज के “आम बजट” की कुछ खास बातें आप भी गौर फरमाएं
- माउथ फ्रेशनर सस्ते […]


“ऑस्कर” पुरस्कारों में “वाटर” को स्थान नहीं, हम परम प्रसन्न। अगर यह फिल्म कनाडा की तरफ से ऑस्कर की होड़ में शामिल हुई थी तो इसमें भारतीयों को किस बात की खुशी होनी चाहिए? “वाटर” विदेशी फिल्म थी और अगर यह ऑस्कर जीतती तो जिस तरह भारतीय संचार माध्यम इसे सिर चढ़ाते, उससे छुटकारा पाकर […]


11 सितम्बर 2001 को अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जुड़वां इमारतों तथा पेंटागन पर विमान गिरा कर किए गए हमले आतंकवादियों ने नहीं बल्कि अमेरिकी सरकार ने ही किए थे? क्या “ट्विन टावर्स” गिरे नहीं बल्कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा ध्वसत किए गए थे? क्या पेंटागन पर कोई  विमान नहीं गिरा था बल्कि अमेरिकी नौसेना […]


हमारे एक मित्र ने कल एनडीटीवी पर आए एक कार्यक्रम के बारे में बताया जिसमें महंगाई पर चर्चा की गई थी। कार्यक्रम में किसी ने टिप्पणी की थी कि “विलासिता की वस्तुओं के दाम सालों-साल नहीं बढ़ते लेकिन दाल-चावल- सब्जी के भाव दिन- दूने रात चौगुने बढ़ते रहते हैं।”
बात पते की है।
कारों के दामों में […]


फिल्म “एकलव्य” के बारे में ये शब्द हमने वरिष्ठ फिल्म समीक्षक ख़ालिद मोहम्मद की इस फिल्म की समीक्षा से लिए हैं, क्योंकि फिल्म देखने के बाद हमें “डिज़ाइनर” -“डिज़ाइनर” शब्द तो बहुत ख्याल आ रहा था लेकिन उससे तुक मिलाता और कोई शब्द याद नहीं आ रहा था।
विधु विनोद चोपड़ा की यह बहुचर्चित फिल्म आंखों […]