Archive for July, 2006
देख आए ओंकारा।“ ठीक है भई, अच्छी फ़िल्म है, लेकिन यह बताइए कि अगर यह फ़िल्म शेक्सपियर के नाटक से प्रभावित नहीं होती तब भी क्या इसकी इतनी ही तारीफ़ होती? हमें लगा था कि फ़िल्म अद्भुत होगी। लेकिन इसे सिर्फ “अच्छी“फ़िल्म ही कहा जा सकता है।
अगर किसी अच्छी साहित्यिक रचना पर अच्छी फ़िल्म बनाने […]
बेचारे सौरव गांगुली, दिन इतने खराब होंगे कभी सोचा भी नहीं था, जिसको देखो वही…..बंगाल टाइगर को टपरिया कर चला जा रहा। पहले गुरू ग्रेग, फिर चयनसमिति के बॉस “मिस्टर किरण मोरे, फिर कुछ साथी खिलाड़ी और अब कुछ पुराने दोस्त जिनमें जॉन राइट और जगमोहन डालमिया शामिल हो गये हैं।
जॉन राइट ने जहां दादा […]
… इसे चाहिये “ओंकारा”!अब देखिये ना, हम काम के बोझ तले ऐसे दबे हैं कि कल चिट्ठाकारी ही नहीं कर पाये। लोग हैं कि नयी फ़िल्म “ओंकारा” की तारीफ में जमीन- आसमान एक किये दे रहे हैं। हम जायें, कि न जायें? मुश्किल यह है कि जो लोग “ओंकारा” की तारीफ कर रहे हैं वे […]
आतंकवादी समूह अल-क़ायदा ने धमकी दी है कि दक्षिणी लेबनान में चल रही इस्राईल-हिज्बुल्ला लड़ाई को वह “चुपचाप बैठा नहीं देखेगा।” क्या यह लड़ाई तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है?
क्या स्व. पी वी नरसिंहराव के प्रधानमंत्रित्वकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय का कोई अधिकारी अमेरिका के लिये जासूसी कर रहा था? भाजपा सरकार में विदेशमंत्री रहे जसवंत सिंह का आरोप तो यही है।