Archive for the 'नया भारत' Category
घड़ी कमर में लटकाऊंगा.. मैं गांधी बन जाऊं..
0 Comments Published by शेखचिल्ली March 6th, 2009 in नया भारत.बचपन में पाठ्य पुस्तक में एक कविता पढ़ी थी, “मां खादी की चादर दे दे , मैं गांधी बन जाऊं।”
कविता में एक बच्चा मां से गांधी जी के जैसी वस्तुएं दिलवाने की मनुहार करता है ताकि वह भी उन्हें लेकर गांधी जी जैसा दिख सके।
उसमें गांधी जी की मशहूर घड़ी का जिक्र था। गांधी जी […]
भारत में “फॉरेन रिटर्न” की बड़ी इज्जत होती है। कोरियाई, चीनी, जापानी वगैरह नहीं, ब्रिटिश और अमेरिकी ठप्पा चाहिए, फिर देखो भारत में कैसे उसकी धूम मचती है। मीडिया तो चरण धो- धो कर पीता है उनके। वैज्ञानिक, कलाकार, लेखक, अंतरिक्ष वैज्ञानिक- जब तक देश में रहते हैं कोई पूछता तक नहीं। अंग्रेजी देस का […]
तो हम आज सुबह उठते, छोटे से ट्रांजिस्टर पर आकाशवाणी से समाचार सुनते कि मुम्बई में पेट्रोल नहीं मिलने से लोगों को भारी दिक्कत हो रही है, और आश्चर्य करते कि पेट्रोल की इतनी क्या जरूरत है।
फिर नाश्ता करके घर से निकलते और खरामा- खरामा टहलते हुए ऑफिस पहुंच जाते जो कि घर से दस […]
भारत चांद पर जा पहुंचा है? यकीन नहीं होता… यह महानगरों की टूटी- फूटी सड़कों वाला, गांवों में गुल बिजली वाला देश चांद पर जा पहुंचा है? कब हो गया, कैसे हो गया, किसने किया यह चमत्कार?
जब हम सरकारी दफ्तरों में चाय पीते, फाइलें टालते समय गुजार रहे थे, घर का कचरा गली में फेंक […]
सुबह से लेकर शाम तक , कौन कहां मरा, कितने वीभत्स तरीके से मरा, खुदकुशी की या बम फटने से मरा, किस- किस तरीके से लोग मर सकते हैं, दुनिया पलटने से या आतंकवाद से, असली लाशें, या हत्या करने का नाट्य रूपांतर, कहां आग लग गई, कहां कार पलट गई, कहां बाढ आ गई, […]