Author Archive for शेखचिल्ली Archive Page
“राजनीति”: उत्तरार्ध की कहानी इंदिरा गांधी पर होती तो?
0 Comments Published by शेखचिल्ली June 5th, 2010 in फ़िल्में.
प्रकाश झा की फिल्म “राजनीति” का प्रथम भाग अत्युत्तम है। महाभारत को समकालीन राजनीति से जोड़ना इतना सटीक बन पड़ा है कि आश्चर्य होता है, क्या महाभारतकाल से अब तक भारतीय राजनीति में कुछ नहीं बदला?
उत्तरार्ध में कहानी महाभारत से हट जाती है और राजनीतिक जोड़तोड़ की कहानी बन जाती है। फिल्म देखते समय हमें […]
एक ही विषयवस्तु ( कभी- कभी भोलेपन में हुआ अपराध भी जिंदगी बना देता है) पर बनीं दो फिल्में। एक महा- उबाऊ पर समीक्षकों की कृपा से हुई हिट, दूसरी फिल्म बेहतरीन, पर समीक्षकों की उपेक्षा से हुई गायब।
“कमीने” उस श्रेणी की फिल्म है जिसे हम “ऑस्कर फिल्म” कहते हैं। कलात्मक, प्रयोगधर्मी, सिरदर्दिया, अंधेरे में […]
शाहरुख खान पर कौन- कौन हंस रहा होगा?
0 Comments Published by शेखचिल्ली April 28th, 2009 in इधर-उधर की.जब सुनील गावस्कर ने कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम में चार कप्तान बनाए जाने के सिद्धांत की आलोचना की थी तब शाहरुख खान ने कहा था, मिस्टर गावस्कर ने 20-20 क्रिकेट नहीं खेला है इसलिए अपनी सलाह अपने पास रखें।
सुनील गावस्कर पर भड़के शाहरूख!
आज शाहरुख की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स की दुर्दशा देख कर गावस्कर […]
घड़ी कमर में लटकाऊंगा.. मैं गांधी बन जाऊं..
0 Comments Published by शेखचिल्ली March 6th, 2009 in नया भारत.बचपन में पाठ्य पुस्तक में एक कविता पढ़ी थी, “मां खादी की चादर दे दे , मैं गांधी बन जाऊं।”
कविता में एक बच्चा मां से गांधी जी के जैसी वस्तुएं दिलवाने की मनुहार करता है ताकि वह भी उन्हें लेकर गांधी जी जैसा दिख सके।
उसमें गांधी जी की मशहूर घड़ी का जिक्र था। गांधी जी […]
“विक्टरी”: क्रिकेट प्रेमी हैं तो देखने जाइए
1 Comment Published by शेखचिल्ली February 3rd, 2009 in फ़िल्में.अगर आपको फिल्म देखना है तो कहीं और जाइए, और अगर आपको बड़े पर्दे पर क्रिकेट देखने का मज़ा लेना है तो फिल्म “ विक्टरी” देखने जरूर जाइए।
हम तो हैं क्रिकेट के बड़े दीवाने, इसलिए फिल्म समीक्षकों की आलोचनाएं अनदेखी कर, इष्ट- मित्रों की सलाह अनसुनी कर हम “विक्टरी” देखने चले गए और खूब आनंद […]